अयोध्या नगरी में अद्भुत घटना | प्रचलित रामायण की कथाओं में
प्राचीन काल में अयोध्या नगरी में एक अद्भुत घटना घटी थी जिसका वर्णन प्रचलित रामायण की कथाओं में कम ही मिलता है। यह घटना प्रभु श्री राम के बाल्यकाल की है। जानें अधिक इस घटना के बारे में।
RAM KATHA


क्या आपको पता है प्रभु श्री राम को बचपन में एक दिव्य धनुष किसने भेंट किया था?
राम समाचार के सभी पाठकों को इस राम सेवक का जय श्री राम!
प्राचीन काल में अयोध्या नगरी में एक अद्भुत घटना घटी थी जिसका वर्णन प्रचलित रामायण की कथाओं में कम ही मिलता है। यह घटना प्रभु श्री राम के बाल्यकाल की है, जब वे अपने भाइयों लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के साथ अयोध्या की गलियों में खेला करते थे।
एक दिन राम और उनके भाई नगर के बाहर वन-उपवन में खेलने गए। खेलते-खेलते वे एक गुफा के पास पहुंचे। गुफा के भीतर से एक अजीब सी आवाज़ आ रही थी। बालक राम को बड़ी उत्सुकता हुई और वे गुफा के भीतर चले गए। भीतर जाकर उन्होंने देखा कि एक वृद्ध साधु ध्यान मग्न होकर बैठे हैं और उनके चारों ओर एक दिव्य ज्योति फैली हुई है।
राम को देखकर साधु ने आंखें खोलीं और मुस्कुराए। उन्होंने राम को पास बुलाया और कहा, "हे राम! मुझे तुम्हारे आगमन का पता था। मैं एक महान योगी से वरदान पाकर जन्मों से तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहा था।"
साधु ने प्रभु श्री राम को एक अद्भुत धनुष दिया जो उस गुफा में सुरक्षित रखा था। यह धनुष मानव निर्मित नहीं था बल्कि देवताओं द्वारा निर्मित एक दिव्य अस्त्र था। साधु ने कहा, "हे राम! यह धनुष तुम्हारे लिए ही बनाया गया है। अपनी धर्म की रक्षा और अधर्म का नाश करने के लिए तुम इस धनुष का प्रयोग करना।"
राम ने उस धनुष को हाथ में लिया और उसकी प्रत्यंचा को खींचा। धनुष की टंकार से पूरी गुफा गूंज उठी। साधु ने श्री राम को आशीर्वाद दिया और अंतर्ध्यान हो गए। राम अपने भाइयों के पास लौट आए और उन्हें पूरी कहानी सुनाई।
राम ने उस दिव्य धनुष को अयोध्या ले जाकर अपने पिता दशरथ को दिखाया। राजा दशरथ ने धनुष देखा तो चकित रह गए। उन्होंने ऋषि वशिष्ठ को बुलाया और यह धनुष दिखाया। ऋषि वशिष्ठ उस धनुष को पहचान गए। उन्होंने राजा दशरथ को बताया, "महाराज, यह धनुष स्वयं भगवान विष्णु का है। यह उनके सुदर्शन चक्र के समान शक्तिशाली है। श्री राम के पास यह धनुष का आना एक शुभ संकेत है। यह दर्शाता है कि भगवान विष्णु स्वयं राम के रूप में अवतरित हुए हैं।"
हालांकि बचपन की यह लीला उतनी चर्चित नहीं हुई, परंतु यह उस दिव्य धनुष की उत्पत्ति की कहानी दर्शाती है जिसने श्री राम के चरित्र को और भी महान बना दिया।
अगली बार फिर मिलेंगे, तब तक आप सभी को राम सेवक का जय श्री राम!
